मकर संक्रांति 2026:तिथि और शुभ मुहूर्त,पूजा विधि और धार्मिक महत्व

वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन का पुण्य काल दोपहर 03:13 बजे से आरंभ होगा। वहीं महा पुण्य काल दोपहर 03:13 बजे से शाम 04:58 बजे तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, इस अवधि में किया गया स्नान-दान और पूजा कई गुना पुण्य फल प्रदान करती है। माना जाता है कि इस शुभ काल में दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और साधक के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

मकर संक्रांति की पूजा विधि

मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही स्नान कर सकते हैं। स्नान करते समय निम्नलिखित मंत्र का उच्चारण करें-

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वति।

नर्मदे सिन्धु कावेरी जलऽस्मिन्सन्निधिं कुरु।।

ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा।

य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: बाह्याभंतर: शुचि:।।

स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा के लिए तांबे का लोटा लें और उसमें स्वच्छ जल भरें। जल में पुष्प, तिल, गुड़ और रोली मिलाएं। पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। अर्घ्य देते समय श्रद्धा पूर्वक “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें। इसके पश्चात सूर्य देव को तिल के लड्डू, खिचड़ी और व्यंजन अर्पित करें। सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। अंत में भगवान सूर्य को प्रणाम कर परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना करें।

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व अत्यंत गहन है। यह पर्व उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है, जब सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अग्रसर होते हैं। उत्तरायण को आध्यात्मिक उन्नति का काल माना गया है। इस समय किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल शीघ्र प्राप्त होता है।

शास्त्रों में उल्लेख है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना, सरस्वती अथवा किसी भी पवित्र जल स्रोत में स्नान करने से मनुष्य के समस्त पापों का क्षय होता है। साथ ही ब्राह्मणों, साधुओं और दीन-दुःखी, निर्धन, जरूरतमंद लोगों को दान देने से भगवान सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व

मकर संक्रांति का पर्व दान-पुण्य के बिना अधूरा माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है, जिसका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। इस दिन दीन-दुःखी, असहाय और जरूरतमंदों की सेवा करने से भगवान सूर्य अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

अन्न और भोजन का दान : इस दिन अन्नदान का विशेष महत्व है। खिचड़ी का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही तिल और गुड़ का दान करने से धन, यश और मान-सम्मान में वृद्धि होती है। इस दिन किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराना मां अन्नपूर्णा की कृपा प्राप्त करने का उत्तम माध्यम माना गया है।

वस्त्र दान : मकर संक्रांति के अवसर पर वस्त्र दान का भी विशेष महत्व है। गरीबों, वृद्धों और जरूरतमंदों को नए वस्त्र, सर्दी में कंबल या स्वेटर का दान करना पुण्यकारी माना जाता है। ऐसा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-शांति का मार्ग प्रशस्त होता है।

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