पूर्णिमा कब है

पूर्णिमा तिथि साल में 12 बार आती है। इनमें 5 पूर्णिमा तिथि का सबसे अधिक महत्व है। कहते हैं कि पूर्णिमा तिथि के दिन व्रत रखकर चंद्रमा सहित शिव पार्वती और लक्ष्मी नारायण की पूजा करने से धन वैभव की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं माघ पूर्णिमा से लेकर गुरु पूर्णिमा और शरद पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और इनकी मान्यताएं।

वैसे आपको बता दें कि साल में आने वाली 12 पूर्णिमा तिथियों में माघ पूर्णिमा, आषाढ़ पूर्णिमा, सावन पूर्णिमा, गुरु पूर्णिमा, आश्विन पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा का विशेष रूप से महत्व है। पूर्णिमा तिथि पर गंगा स्नान करना भी बहुत पुण्यदायी माना गया है।

गुरु पूर्णिमा: गुरु-शिष्य परंपरा का सम्मान
शरद पूर्णिमा: फसल के मौसम का जश्न मनाती है
लक्ष्मी पूर्णिमा: देवी लक्ष्मी को समर्पित
कार्तिक पूर्णिमा: कार्तिक माह के अंत का प्रतीक है

पूर्णिमा व्रत की विधि
पौराणिक धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन तीर्थस्थल पर स्नान करना बहुत शुभ होता है|
अगर ऐसा करना संभव न हो तो शुद्ध जल में गंगा जल मिलाकर घर पर भी स्नान किया जा सकता है|
पूर्णिमा तिथि पितृ तर्पण हेतु भी बहुत शुभ मानी जाती है|
इस दिन प्रातःकाल संकल्प लेकर पूर्ण विधि-विधान से चंद्रदेव की पूजा करनी चाहिए।
चंद्रमा की पूजा करते समय व्यक्ति को इस विशेष मंत्र-ऊँ सों सोमाय नम: अथवा ऊँ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नम: का उच्चारण करना चाहिए|
चन्द्रमा का भगवान शिव से भी घनिष्ठ संबंध है क्योंकि भगवान शिव ने चन्द्रमा को अपनी जटाओं में धारण कर रखा है| इसलिए इस दिन यदि चन्द्रमा की पूजा के अतिरिक्त शिव पूजा भी की जाए तो अनंत गुणा फल प्राप्त होता है|
चन्द्रमा एक स्त्री ग्रह है इसलिए माँ पार्वती का प्रतीक भी है| यदि भगवान शिव के साथ-साथ माँ पार्वती व संपूर्ण शिव परिवार की पूजा की जाय तो यह अत्यंत शुभफलदायी माना जाता है|
तत्पश्चात रात्रि में मौन होकर भोजन करना चाहिए। प्रत्येक मास की पूर्णिमा को इसी प्रकार चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए। इससे व्यक्ति को सभी सुखों के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्राप्त होती है।

पूर्णिमा से जुड़े कुछ विशेष तथ्य
पूर्णिमा में यज्ञ व अन्य मांगलिक कार्य, विवाह, देव-प्रतिष्ठा आदि करना शुभ माना जाता है।
पूर्णिमा तिथि शिव पूजन और समस्त धार्मिक कार्यों के लिए अच्छी मानी गई है|
पौराणिक कथाओं के अनुसार यह राहु ग्रह की जन्म तिथि भी है।
माघ, कार्तिक, ज्येष्ठ एवं आषाढ़ मास में आने वाली पूर्णिमा को दान हेतु बहुत शुभ समझा जाता है|
इस तिथि पर समुद्रीय ज्वार-भाटा अपनी चरम सीमा पर होता है।
यदि समस्त पूर्णिमाओं पर व्रत करना संभव न हो तो कम से कम कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को व्रत अवश्य करना चाहिए|
पूर्णमासी का व्रत करने वाली स्त्री को आजीवन सौभाग्य की प्राप्ति होती है|

र्णिमा व्रत के लाभ- इस व्रत से मिलने वाले लाभ निम्नलिखित हैं-

मानसिक कष्टों से मुक्ति हेतु पूर्णिमा का व्रत करना अत्यंत होता है|
पारिवारिक कलह और अशांति दूर करने के लिए भी पूर्णिमा का व्रत करना शुभ फलदायी होता है|
जिन व्यक्तियों की पत्रिका में चंद्र ग्रह पीड़ित व दूषित हो और इस ग्रह के कारण जीवन में समस्याएं आ रही हों तो उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए|
इस दिन शिवलिंग पर शहद, कच्चा दूध, बेलपत्र, शमीपत्र आदि चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा व्यक्ति पर सदैव बनी रहती है और किसी भी रोग से मुक्ति मिलती है|
जिन लोगों को अकारण भय बना रहता हो और मानसिक चिंता अधिक सताती हो उन्हें भी पूर्णमासी का व्रत जरूर करना चाहिए|
लंबे और प्रेम से भरे दाम्पत्य जीवन की प्राप्ति हेतु भी पूर्णिमा का व्रत करना बहुत शुभ होता है

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