
निर्जला एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह सबसे कठिन व्रतों में से एक है। ज्येष्ठ महीने में पड़ने वाली इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन व्रती पूरे 24 घंटे के लिए अन्न जल का सेवन नहीं करते हैं।
निर्जला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने, धन-धान्य की वृद्धि और कष्टों को दूर करने के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं –
प्रतिमा स्थापित करें
निर्जला एकादशी के दिन आप भगवान विष्णु की प्रतिमा या फिर चित्र को स्थापित करें। इसके बाद प्रतिमा क सामने घी का दीपक जलाएं। इस उपाय से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और जातक को मनचाहा फल देते हैं।
मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं
निर्जला एकादशी के दिन मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से सारी नकारात्मकता दूर होती है। इससे देवी लक्ष्मी का आगमन होता है।
पीपल के पास दीपक जलाएं
पीपल के पेड़ के पास भी इस दिन आप दीपक जला सकते हैं। इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है
स्नान करें
इस दिन ज्येष्ठ अमावस्या पर पवित्र नदी में सुबह ब्रह्म मुहर्त में या फिर दिनभर में कभी भी स्नान किया जा सकता है
मंत्र जाप:
आर्थिक स्थिति में सुधार और मनोकामना पूर्ति के लिए विष्णु जी के मंत्रों (जैसे – ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या ॐ श्री विष्णुवे नमः) का 108 बार जाप करें।दान-पुण्य: इस दिन जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और फल का दान करें। ऐसा करने से पूरे साल की एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है。विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ: भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।क्या आप इस व्रत के दौरान नियमों (जैसे फलाहार या पूजा विधि) के बारे में जानना चाहते हैं, या अपनी किसी विशिष्ट मनोकामना (जैसे धन, नौकरी, या पारिवारिक शांति) के अनुसार कुछ विशेष उपाय पूछना चाहते हैं?


