रंगभरी एकादशी 2026: रंगभरी एकादशी हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव और उनके परिवार की पूजा करने से साधक के जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, विवाह के बाद भगवान शिव और माता पार्वती का प्रथम आगमन काशी में इसी शुभ तिथि पर हुआ था। इसलिए काशी में रंगभरी एकादशी विशेष उत्साह और धूमधाम से मनाई जाती है। इसी दिन से काशी में होली उत्सव की शुरुआत भी मानी जाती है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आइए जानते हैं कि वर्ष 2026 में रंगभरी एकादशी कब मनाई जाएगी।

रंगभरी एकादशी/ रंगभरी एकादशी इस के लिए शुभ मुहूर:ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 05 बजकर 08 मिनट से 05 बजकर 58 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 18 मिनट से 06 बजकर 58 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक
विजय मुहूर्त- 02 बजकर 29 मिनट से 03 बजकर 15 मिनट तक
रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त विभिन्न उपाय:इस दिन शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है तथा उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। आइए जानें कि रंगभरी एकादशी पर भगवान शिव को कौन-सी चीजें चढ़ानी चाहिए।
शिव जी को अबीर-गुलाल करें अर्पित
रंगभरी एकादशी के दिन महादेव को रंग और गुलाल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से अबीर-गुलाल चढ़ाता है, उसके जीवन से दुख दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।
क्यों चढ़ाया जाता है रंग-गुलाल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव माता पार्वती का गौना कराकर काशी लाए थे। उनके स्वागत में पूरी काशी नगरी ने अबीर-गुलाल उड़ाकर उत्सव मनाया था। इसी कारण इस दिन शिवलिंग पर गुलाल चढ़ाने का विशेष महत्व है। महादेव के साथ माता पार्वती को भी लाल गुलाल और सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है। माना जाता है कि शिव-शक्ति को एक साथ रंग अर्पित करने से दांपत्य जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
शिव जी को आंवला चढ़ाएं
रंगभरी एकादशी को आंवला एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव को आंवला अर्पित करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि आंवला चढ़ाने से स्वास्थ्यअच्छा रहता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।



