अंगारकी संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व
इस दिन का महत्व :
संकटों का नाश: ‘संकष्टी’ का अर्थ है संकटों को हरने वाली। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं।
माघ चतुर्थी का विशेष फल: माघ महीने की चतुर्थी (जिसे सकट चौथ या तिलकुटा चौथ भी कहा जाता है) का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। यह संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
चंद्र दर्शन का महत्व: संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है। आज रात चंद्रोदय का समय लगभग रात्रि 08:35 PM (स्थान के अनुसार भिन्न) है।
भगवान गणेश की कृपा: इस दिन श्री गणेश के ‘लम्बोदर’ स्वरूप की पूजा की जाती है। भक्त उन्हें तिल के लड्डू और दूर्वा अर्पित करते हैं

तिथि और समय
संकष्टी चतुर्थी का चतुर्थी तिथि 6 जनवरी 2026 को सुबह 8:01 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 7 जनवरी 2026 को सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। इस अवधि में गणेशजी के मंत्रों का उच्चारण और पूजा अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
व्रत और पूजा पद्धति
भक्तगण इस दिन सूर्योदय से चंद्रमा दर्शन तक व्रत रखते हैं। व्रत के दौरान सामान्यतः दाल, फल, और अन्य हल्का आहार ग्रहण किया जाता है, या पूरी तरह निर्जला व्रत रखा जाता है। चंद्रमा के दर्शन के पश्चात अर्घ्य (जल अर्पण) किया जाता है, जो संकर्षण और बाधाओं से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है। अंगारकी संकष्टी चतुर्थी के दौरान, भक्त विशेष रूप से “गणपति अथर्वशीर्ष” का पाठ करते हैं और गणेश मंत्रों का उच्चारण कर समस्त संकटों के निवारण की प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किया गया व्रत और भक्ति का समर्पण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक होता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और सिद्धियों के दाता के रूप में माना जाता है। मंगलवार को संकष्टी चतुर्थी का पड़ना इसे और भी प्रभावशाली बनाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को मानसिक शांति, आर्थिक समृद्धि और पारिवारिक सौहार्द की प्राप्ति होती है। अंगारकी संकष्टी चतुर्थी केवल धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह भक्तों को आत्म-नियंत्रण, संयम और आध्यात्मिक जागरूकता का अवसर भी प्रदान करती है। व्रत का पालन और पूजा-पाठ जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मक दृष्टिकोण को जन्म देती है।
6 जनवरी 2026 की अंगारकी संकष्टी चतुर्थी, भगवान गणेश की विशेष कृपा का प्रतीक है। यह पर्व न केवल व्यक्तिगत जीवन में समृद्धि लाने का मार्ग है, बल्कि समाज में भी आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक अनुशासन को बनाए रखने में सहायक माना जाता है। भक्तगण इस दिन व्रत और पूजा द्वारा अपने जीवन की बाधाओं का निवारण कर सकेंगे और सुख, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की प्राप्ति कर सकेंगे।


