5 फ़रवरी की संकष्टी चतुर्थी पर किए जाने वाले सरल व प्रभावी उपायऔर व्रत कथा

संकष्टी चतुर्थी के विशेष उपाय (Upay)

  1. भगवान गणेश को दुर्वा अर्पित करें

21 या 11 दुर्वा चुनकर गणपति को चढ़ाएँ।

इससे मानसिक तनाव कम होता है और कार्यों में बाधाएँ दूर होती हैं।

  1. चंद्रमा को अर्घ्य दें

रात में चंद्रदर्शन के बाद जल, दूध, शहद, चीनी मिलाकर अर्घ्य दें।

कहते हैं इससे परिवार में सुख-शांति और स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

  1. “वक्रतुंड महाकाय” मंत्र का जप

108 बार जाप करें।
मंत्र:
“वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”

इससे कार्यों में सफलता मिलती है।

  1. तिल से गणेशजी की पूजा

इस दिन तिल (काले या सफेद) से गणेशजी को नैवेद्य देना शुभ माना जाता है।

धन व स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियाँ कम होती हैं।

  1. मोदक या गुड़-तिल के लड्डू का भोग

गणेशजी को उनके प्रिय मोदक या गुड़-तिल के लड्डू अर्पित करें।

जीवन में मिठास और सौभाग्य बढ़ता है।

  1. गरीबों को तिल और गुड़ दान करें

दान करने से पापों का शमन होता है और पुण्य की प्राप्ति।

बुधवार या चतुर्थी के दिन ऐसा दान विशेष रूप से शुभ माना गया है।

  1. श्री गणेश सहस्रनाम या संकटनाशन स्तोत्र का पाठ

विशेषकर संध्या समय करने से मानसिक शांति और बाधाओं का निवारण होता है।

  1. पीपल या बेल के पेड़ पर दीपक जलाएँ

शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाकर संकल्प लें।

नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

यदि आप चाहें तो मैं पूजा विधि, व्रत कथा, या आपकी मनोकामना के अनुसार विशेष उपाय भी बताकर दे सकता हूँ।

  1. संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

एक समय की बात है, किसी नगर में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। उसके परिवार में हमेशा कष्ट रहते थे। एक दिन वह परेशान होकर जंगल की ओर चला गया। रास्ते में उसे एक ऋषि मिले। ब्राह्मण ने उन्हें अपनी दुखभरी कथा सुनाई और कहा—
“गुरुदेव, मेरे परिवार में लगातार संकट क्यों आ रहे हैं? इससे छुटकारा कैसे मिलेगा?”

ऋषि बोले—
“तुम संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया करो। गणपति बाप्पा स्वयं तुम्हारे सारे कष्ट हर लेंगे और तुम्हारी मनोकामना पूरी होगी।”

ब्राह्मण ने अगले महीने से संकष्टी चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने नियमपूर्वक उपवास रखा, शाम को गणेशजी की पूजा की और चंद्रमा को अर्घ्य दिया। कुछ ही समय में उसके घर की गरीबी दूर होने लगी। व्यापार बढ़ा, घर में शांति आई और स्वास्थ्य भी सुधरने लगा।

एक वर्ष बाद उसने ऋषि को फिर ढूंढा और धन्यवाद देकर बोला—
“गुरुदेव, गणेशजी के इस व्रत के प्रभाव से मेरे जीवन से सारे संकट दूर हो गए।”

तब ऋषि बोले—
“जो भी व्यक्ति संकष्टी चतुर्थी का व्रत श्रद्धा से करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध होते हैं और भगवान गणेश उसकी हर इच्छा पूरी करते हैं। यह व्रत ‘संकटनाशक’ है।”

इस प्रकार यह व्रत चतुर्थी का महत्त्व बढ़ गया और आज भी भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत करते हैं।

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